परा विद्या और अपरा विद्या


 तत्रापरा ऋग्वेदो यजुर्वेदः सामवेदोऽथर्ववेदः शिक्षा कल्पो व्याकरणं निरुक्तं छन्दो ज्योतिषमिति। अथ परा यया तदक्षरमधिगम्यते ॥ ५ ॥

​उनमें ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद, शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द और ज्योतिष—यह अपरा है तथा जिससे उस अक्षर परमात्माका ज्ञान होता है वह परा है ॥ ५ ॥

शब्दार्थ

  • तत्र — उनमें, उन दोनों विद्याओं में
  • अपरा — निम्न विद्या, लौकिक विद्या
  • ऋग्वेदः — ऋग्वेद
  • यजुर्वेदः — यजुर्वेद
  • सामवेदः — सामवेद
  • अथर्ववेदः — अथर्ववेद
  • शिक्षा — उच्चारण-विज्ञान, स्वर एवं वर्णों का ज्ञान
  • कल्पः — यज्ञ, संस्कार एवं धार्मिक विधियों का शास्त्र
  • व्याकरणम् — भाषा के शुद्ध प्रयोग का शास्त्र
  • निरुक्तम् — वैदिक शब्दों की व्युत्पत्ति एवं अर्थ बताने वाला शास्त्र
  • छन्दः — वैदिक छंदों का शास्त्र
  • ज्योतिषम् — ग्रह-नक्षत्र, काल-निर्णय तथा यज्ञ के शुभ समय का शास्त्र
  • इति — इस प्रकार
  • अथ — और, अब
  • परा — श्रेष्ठ विद्या, ब्रह्मविद्या
  • यया — जिसके द्वारा
  • तत् — उस
  • अक्षरम् — अविनाशी, शाश्वत ब्रह्म (परमात्मा)
  • अधिगम्यते — जाना जाता है, प्राप्त किया जाता है, साक्षात्कार होता है।

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