सर्वज्ञः


 यः सर्वज्ञः सर्वविद्यस्य ज्ञानमयं तपः। तस्मादेतद्ब्रह्म नाम रूपमन्नं च जायते ॥ ९ ॥

​हिंदी व्याख्या: जो सबको (सामान्यरूपसे) जाननेवाला और सबका विशेषज्ञ है तथा जिसका ज्ञानमय तप है उस (अक्षरब्रह्म) से ही यह ब्रह्म (हिरण्यगर्भ), नाम, रूप और अन्न उत्पन्न होता है ॥

शब्दार्थ

  • यः — जो
  • सर्वज्ञः — सब कुछ जानने वाला, समस्त का सामान्य ज्ञाता
  • सर्ववित् — सबका विशेष रूप से जानने वाला, सर्वविद्या का पूर्ण ज्ञाता
  • यस्य — जिसका
  • ज्ञानमयम् — ज्ञानस्वरूप, ज्ञान से युक्त
  • तपः — तप, ज्ञानमय संकल्प, सृष्टि-रचना की दिव्य शक्ति
  • तस्मात् — उस (अक्षर ब्रह्म) से
  • एतत् — यह
  • ब्रह्म — हिरण्यगर्भ, सृष्टि का प्रथम प्रकट कारण
  • नाम — नाम, पहचान, संज्ञा
  • रूपम् — रूप, आकार, स्वरूप
  • अन्नम् — अन्न, भौतिक पदार्थ, जीवन-धारण का आधार
  • — और
  • जायते — उत्पन्न होता है


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